बीकानेर बुलेटिन
बीकानेर के बहुचर्चित रेमडेसीविर इंजेक्शन घोटाले में जयपुर महानगर की पीठासीन अधिकारी गीता चौधरी ने एसओजी कार्यवाही में पकड़े गए तीन आरोपियों अनुज प्रदीप और विनय की जमानत खारिज कर दी है। तीनों अभियुक्तों ने कोर्ट में दो अलग अलग जमानत प्रार्थना पत्र पेश किए थे। कोर्ट ने वीसी के जरिए अभियुक्त के वकील और अपर लोक अभियोजक की दलीलों को सुना और तीनों अभियुक्तों की जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना है कि अभियुक्तों के खिलाफ अत्यंत गंभीर व राज्य सरकार व आमजन के विरुद्ध अपराध होने के कारण जमानत की सुविधा का लाभ दिया जाना उचित नहीं लगता, साथ ही यह भी कहा कि अनुसंधान जारी है इस स्टेज पर उन्हें लाभ देना अनुसंधान पर प्रभावित असर डाल सकता है । इसलिए दोनों आवेदन अस्वीकार किए जाते हैं।
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| तीनों आरोपी |
आपको बता दें कि एसओजी की टीम ने रेमडेसीविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में 1 अप्रैल से 3 मई के बीच ड्रग कंट्रोलर ने बीकानेर और बाहर 890 इंजेक्शन का वितरण करना बताया था, जबकि छह स्टॉकिस्ट का रिकॉर्ड खंगाला गया तो प्राइवेट अस्पताल डॉक्टर और मेडिकोज को 1400 को इंजेक्शन दिए गए। एसओजी ने 510 इंजेक्शन का घोटाला माना और मित्तल फार्मा और मित्तल ड्रग एजेंसी के तीन आरोपियों अनुज प्रदीप और विनय को गिरफ्तार कर लिया था।
Labels: #बीकानेर, अपराध
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